आज EV सिर्फ गाड़ी नहीं, एक ट्रेंड बन चुकी है।
लेकिन अफसोस – ज्यादातर लोग अब भी EV को लेकर कई गलतफहमियों में जी रहे हैं।
EV Myths vs Facts को जानना जरूरी है, वरना या तो आप गलत कार खरीदेंगे… या EV से हमेशा दूर रहेंगे।
तो चलिए जानते हैं – EV Myths vs Facts की पूरी सच्चाई, वो भी आसान भाषा में।
1.पावर के मामले में EV कमजोर है – ये सबसे बड़ा Myth है
लोग अब भी मानते हैं कि EV का पिकअप कमजोर होता है।
पर सच्चाई ये है कि EV का पावर इंस्टेंट होता है।
उदाहरण लें – Tata Nexon EV Prime।
ये कार सिर्फ 9 सेकंड में 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ लेती है।
तो ये सोचना बंद करें कि EV धीमी होती है।
2. बैटरी जल्दी खराब हो जाती है – गलत धारणा है
EV बैटरी को लेकर डर सबसे आम है।
लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि ज्यादातर ब्रांड 8 साल या 1.6 लाख किमी की बैटरी वारंटी देते हैं।
मतलब – बैटरी खराब होने का डर सिर्फ भ्रम है, असली खतरा नहीं।
3. चार्जिंग स्टेशन कम हैं – अब ये भी Myth है
हां, पहले EV चार्जिंग नेटवर्क कमजोर था।
पर अब सरकार और कंपनियां मिलकर हजारों चार्जिंग पॉइंट्स लगा रही हैं।
2025 तक हर शहर में 2000+ चार्जिंग पॉइंट्स का टारगेट है।
तो ये Myth अब सच्चाई नहीं रहा।
आप भारत में EV चार्जिंग स्टेशन ढूंढना चाहते हो तो Tata Power EZ Charge – India’s largest EV charging network जरूर देखें। इसका 5,500+ पब्लिक और 1 लाख+ होम चार्जर नेटवर्क पूरे देश में फैला है।
4. EV महंगी है, लेकिन लॉन्ग टर्म में फायदेमंद है
शुरुआत में EV महंगी लगती है।
लेकिन मेंटेनेंस और फ्यूल कॉस्ट देखें, तो EV सस्ती साबित होती है।
1-1.5 रुपये प्रति किमी खर्च, और 3-4 साल में गाड़ी का पैसा वसूल हो जाता है।
5. EV सिर्फ शहर के लिए है – ये सोच भी गलत है
आज सिर्फ सिटी EV ही नहीं हैं।
Tata Nexon EV, MG ZS EV जैसी कारें हाईवे और लंबी दूरी के सफर के लिए भी बनी हैं।
तो अब EV खरीदना सिर्फ सिटी ड्राइव तक सीमित नहीं रहा।
6. EV मेंटेनेंस बहुत महंगा होता है – सच्चाई उलटी है
EV में ना ऑयल चेंज, ना गियरबॉक्स, ना क्लच।
मेंटेनेंस खर्चा बहुत कम है।
पेट्रोल कार के मुकाबले 60-70% कम खर्च आता है EV में।
तो ये भी सिर्फ एक मिथक है, हकीकत नहीं।
7. EV की रीसेल वैल्यू नहीं है – गलतफहमी है
पहले EV का रीसेल मार्केट छोटा था।
लेकिन जैसे-जैसे लोग EV अपना रहे हैं, रीसेल वैल्यू भी मजबूत हो रही है।
तो ये मान लेना कि EV बिकेगी नहीं, एक बेवजह का डर है।
EV Myths vs Facts: लोगों के दिमाग में क्या है, और हकीकत क्या है
| EV से जुड़ा भ्रम (Myth) | हकीकत (Fact) |
|---|---|
| EV में पावर नहीं होती | Nexon EV सिर्फ 9 सेकंड में 100 km/h पकड़ लेती है। |
| EV की बैटरी जल्दी खराब हो जाती है | 8 साल या 1.6 लाख किमी की वारंटी मिलती है। |
| चार्जिंग स्टेशन नहीं मिलते | 2025 तक हजारों नए चार्जिंग पॉइंट्स खुल जाएंगे। |
| EV महंगी है, फायदा नहीं देती | 3-4 साल में लागत वसूल हो जाती है। |
| EV सिर्फ शहरों के लिए है | लंबी दूरी की EV गाड़ियां अब बाजार में उपलब्ध हैं। |
| EV का मेंटेनेंस बहुत खर्चीला है | पेट्रोल गाड़ियों से 70% सस्ता मेंटेनेंस है। |
| रीसेल वैल्यू नहीं है EV की | अब EV रीसेल मार्केट भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है। |
EV Myths vs Facts – सच्चाई जानिए, सही निर्णय लीजिए
अब जब आपको EV Myths vs Facts की सच्चाई पता चल गई है,
तो आप समझ सकते हैं कि EV लेना गलत फैसला नहीं है।
अभी भी सोच समझकर गाड़ी चुनें,
पर पुरानी बातों पर आंख मूंदकर भरोसा करना छोड़ दीजिए।
EV अब भविष्य नहीं, वर्तमान है।